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चाँदनी गुम है
चाँद पूरा है फलक पर चाँदनी गुम है रात पूनम की है लेकिन रौशनी कम है. दिल में बेचैनी बहुत है आँख भी नम है चाँद पूरा है फलक पर चाँदनी गुम है. छुप गया वो चाँद जबसे बादलों के पार न कभी आराम आया नींद भी गुम है. उसके घर शहनाई बजी थी हाँथ पीले हुए साथ मेरे तन्हाई चली थी अब तलक संग है. या खुदा अब मौत दे दे ज़िन्दगी खतम है चाँद पूरा है फलक पर चाँदनी गुम है. आनंद प्रवीण, पटना विश्वविद्यालय, पटना.
मेरा घर
मैं उस से प्रेम करता हूंँ आज से नहीं वर्षों से जब से उसका नाम सुना हूँ. मुझे वह नाम घर- सा लगता था जिसके बारे में सोच कर भी खुश हो सकता था. आज भी वह नाम अच्छा लगता है पर घर सा नहीं लगता शायद उस नाम के साथ जो मेरे घर का रिश्ता था वह टूट चुका है शायद वह नाम अपना अर्थ हो चुका है शायद मैं ही बदल गया हूँ पर मैं अपना घर नहीं बदलना चाहता मैं अपने घर को प्यार करना चाहता हूंँ. मैं जिंदा रहना चाहता हूंँ मैं फिर से उसे प्रेम करना चाहता हूँ. आनंद प्रवीण