मेरा घर

मैं उस से प्रेम करता हूंँ 
 आज से नहीं 
 वर्षों से 
 जब से उसका नाम सुना हूँ.

 मुझे वह नाम घर- सा लगता था
 जिसके बारे में सोच कर भी खुश हो सकता था.

 आज भी वह नाम अच्छा लगता है
 पर घर सा नहीं लगता
 शायद उस नाम के साथ जो मेरे घर का रिश्ता था वह टूट   चुका है शायद वह नाम अपना अर्थ हो चुका है
 शायद मैं ही बदल गया हूँ
 पर मैं अपना घर नहीं बदलना चाहता
 मैं अपने घर को प्यार करना चाहता हूंँ.
 मैं जिंदा रहना चाहता हूंँ
 मैं फिर से उसे प्रेम करना चाहता हूँ.

       आनंद प्रवीण

Popular posts from this blog

चाँदनी गुम है