रिवर्स फायर- राकेश राय


 राकेश राय द्वारा लिखित उपन्यास 'रिवर्स फायर' पढ़ा। यह उनका पहला उपन्यास है। मैं उनसे बहुत पहले से जुड़ा रहा हूँ और उनसे अभिनय के गुर भी सीखता रहा हूँ इसलिए उनके व्यक्तित्व को समझता हूँ। 

अनन्य प्रकाशन से प्रकाशित इस उपन्यास के कुल १३ भाग हैं जो १५० पृष्ठों में विस्तृत है। उपन्यास के केन्द्र में एक पात्र जयंत है और दूसरा उसका पिस्तौल। दोनों की अपनी अलग कहानी है, अलग पहचान है और उद्देश्य भी अलग अलग हैं। जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती है, जयंत पर्दे के पीछे चला जाता है और पिस्तौल की उपस्थिति दृढ़ होती जाती है। असल में हमारे सामाज की भी यही स्थिति है। यहां व्यक्ति गौण है और मुख्य है समाज में उसकी हैसियत, शौहरत और जाति। उपन्यास में कुल चार हत्याएं होती हैं, किन्तु इस पिस्तौल से तीन हत्याएं होती हैं। पहली हत्या बैजू की होती है जो स्वयं जयंत करता है। बैजू कमजोर वर्ग का एक किसान होता है जो अपनी जमीन जयंत को नहीं बेचना चाहता है। इस कारण ही उसकी हत्या होती है। 

दूसरी हत्या सुरेश की होती है जो पिछड़े समाज से आता है और एक अगड़ी जाति की लड़की लता से प्रेम करता है। लता से एक और लड़का प्रेम करता है भानू जोकि अगड़ी जाति का ही है और जयंत का पुत्र है। भानू को लगता है कि लता निम्न जाति के लड़के से प्रेम क्यों करेगी ; उसे अपनी जाति के लड़के से प्रेम करना चाहिए। भले उसमें दुनिया भर की बुराइयाँ हो। सुरेश के पिता इंजिनियर हैं, धन-धान्य से परिपूर्ण हैं और वह प्रतिभाशाली भी है। पर इससे क्या? है तो वह निम्न जाति का लड़का ! भानू को जितना दुःख लता के न मिलने से है उससे कहीं अधिक दुःख इस बात पर है कि वह एक निम्न जाति के लड़के को प्रेम करती है। इस दुःख या जलन का अंत सुरेश की हत्या से होता है। 

             तीसरी हत्या बड़े ही दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से स्वयं जयंत की होती है। जयंत ने अपने जीवन में जो भी गलतियाँ की थी उसका अफसोस था उसके दिल में और बाकी जीवन शरीफों की भांति व्यतीत करने की सोच रखता था। गाँधी जी के विचार में उसका हृदय परिवर्तन हो गया था पर पिस्तौल से निकलने वाली उस बुलेट को क्या पता इस कृत्य का अर्थ। चालीस साल तक जिस पिस्तौल से जयंत लोगों को डराया करता था, एक हत्या भी की ; अंततः उसी पिस्तौल का शिकार होना पड़ा। यही उपन्यास का मूल है। हमारे यहाँ कहावत भी है , जैसा बोओगे वैसा काटोगे।

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