तुम मेरी शायरी हो

तुम्हारा नाम मेरे दिल में मेरे नाम सा है
सच है यह भी कि मुझे इसका ग़ुमान सा है.

उजड़ चुकी है जो बस्ती वो फिर बस जाएगी
जरा ठहरो अभी मौसम बेइमान सा है.

तुम्हारे जिस्म को छूना तो बस एक बहाना है
तुम्हारी रूह को छू पिना एक मुकाम सा है.

चाँद निकलता है हर बार तेरी याद लिये
रात होना तुम्हारा साथ होने सा है.

मेरी शायरी निकलती है तेरे नाम से ही
तेरा नाम मेरे दिल में शायरी सा है.

   आनंद प्रवीण 

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